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प्रदूषण और स्वास्थ्य प्रभाव

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 आज के आधुनिक समय में प्रदूषण सबसे गंभीर वैश्विक समस्याओं में से एक है। यह न केवल पर्यावरण को प्रभावित करता है बल्कि हमारे स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। आज प्रदुषण के काई कारण उपलब्ध है परंतु औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली ने प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया है। प्रदूषण के कई रूप हैं—मुख्यतः वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। वायु प्रदूषण का अर्थ है वातावरण में हानिकारक गैसों, धूलकणों और रासायनिक पदार्थों की अत्यधिक मात्रा का होना। वाहनों से निकलने वाला धुआँ, औद्योगिक इकाइयों से उत्सर्जन, पराली जलाना और घरेलू ईंधन का प्रयोग इसके प्रमुख कारण हैं। इसी के कारण, दिल्ली और उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर ‘गंभीर’ स्तर तक पहुँच जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि भारत के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जेसे सांस लेने में कठिनाई, अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर और हृदय रोग जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर और भी गंभीर होता है। वायु प्रदूषण ...